
मैया प्यारी से मिलना बड़ा जरूरी…….
जो मैं होती पवन बसंटी झोंका बनकर आती,
हो मैया रानी की चुनरी को लहर लहर लहराती,
बन ना सकी मैं हवा का झोंका ये मेरी मज़बूरी,
जो मैं होती काली बदरिया छम छम नीर बहाती,
बरस बरस कर गरज गरज कर मैया को नहलाती,
बन ना सकी मैं काली बदरिया ये मेरी मज़बूरी,
जो मैं होती वन की मोरनी छम छम नाच दिखाती,
नाच नाच कर कूद कूद कर मैया जी को रिझाती,
बन ना सकी मैं वन की मोरनी ये मेरी मज़बूरी,
जो मैं तेरा पता जानती खत लिखती भिजवाती,
सब रसकन को संग में लेकर तुमसे मिलने आती,
पता मेरे पास नही ये मेरी मज़बूरी,
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