
सुमिरन में सुख भारी,
देखा है हमने,
ए राजा गोपीचंद भरतरी भजीया,
गोपीचंद भरतरी भजीया,
छोड़ चलीया है घरबारी भई ओ,
छोड़ चलीया घरबारी,
ध्रुव ध्यान मे लग्यो सुमिरन मे,
लियो प्रहलाद विचारी,
कष्ट सयो सुमिरन नही छोड्यो,
किनी है मोक्ष ललकारी भई,
किनी है मोक्ष ललकारी,
राजा हरिश्चन्द्र रानी तारादे,
नीच घरे पनिहारी,
स्वासो स्वास लाग्यो सुमिरन मे,
शब्द ने ओट विचारी भई,
शब्द ने ओट विचारी,
सुमिरन मौज लगी जिन अंदर,
दिन दिन करे अवतारी,
सुमिरन राम जपो अचंभा,
उन घर की बलिहारी भई ओ,
उन घर की बलिहारी,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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