
सावन महीना आए
झूला झूलदी भवानी ॥
झूलदी भवानी,
ऊंचे पीपल पे पेंगें पाईयां,
सत्तों ही बहनें झूला झूलण आईयां ॥
ओह सभनां ते करम कमावे,
सावन महीना आया…
काली माता पेंग चढ़ावे,
धरती थर-थर कांपदी जावे ॥
ओह ऊंची पेंग चढ़ावे,
सावन अष्टमी पेंग चढ़ावे,
माता ज्वाला झूला झूलण आवे ॥
ओह बेड़े पार लगावे,
वैष्णो मां दी वारी आई,
झूला देवे चिंतपूर्णी माई ॥
ओ झूले पवन दी चाल,
अपलोडर – अनिल राममूर्ति भोपाल
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