
हमनी के छोरी के नगरिया नु हो कहवा जयेबू ए माई,
तुही त हउ मोहे महतरिया नु हो कईसे करी हम बिदाई,
बड़ा रे जतनवा से मुरुती बनावनी
मूर्ति बनायीं हम तोहके बुलवनी ......
थर थर कापत ता सरिरिया नु हो कईसे मुरुती उठाई ,
तुही त हउ मोहे महतरिया नु हो कैसे करी हम बिदाई ,
तोहरे चरनिया में लेयेनी आशिर्बदवा,
छोर के तू काहे जालू बेटा के घरवा ,
बन गेलु आँखी के पुतरिया नु हो कैईसे तोहे बिसरायीं,
नवदीन निरखे माई सब सूख पवनी
तोहरे चरनिया में नेहियाँ लगवनी
राउरे चरनिया में नेहियाँ लगवनी
तोहरे पर हमनी के पगारिया नु हो ,
हरदम लजिया बचायी,
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