
हम कब से पड़े है शरण तुम्हारी सुनलो साँवरिया
हम कब से पड़े है,
शरण तुम्हारी,
सुनलो साँवरिया,
हम कोई गैर नही,
नौकर तेरे दरबार के हम है,
सुन लो साँवरिया,
तर्ज – एक बार तो राधा बनकर।
गुजरा हुआ हर पल,
हमे याद आता है,
तेरे सिवा हमको,
ना कोई भाता है,
मेरी लाज तुम्हारे हाथ है,
अपनों से साँवरिया,
परहेज है कैसा,
देखा ना दुनिया में,
दिलदार तुम जैसा,
हम तेरे आसरे कब से बैठे,
बस इतनी तमन्ना है,
दीदार हो तेरा,
कहीं बिखर ना जाए श्याम,
अनमोल प्यार मेरा,
अब निर्मोही ना बनो ‘ओम’ की,
गायक – ओम गोयनका।
प्रेषक – अनंत गोयनका।
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