
हारा हूँ मैं जग से प्रभु,
तुम्हे मुझको जिताना है,
तेरा दर ही मेरा बाबा,
आखरी ठिकाना है,
तर्ज – होंठों से छू लो।
दुनिया के थपेड़ो ने,
मुझे जख्म दिए गहरे,
दिल से ना कोई अपना,
बस नाम के है मेरे,
कैसे मैं कहूं तुमको,
क्या कहता जमाना है,
कुछ बातें है मन की,
बस तुमसे ही करनी है,
अनसुनी ना करना,
नहीं और से कहनी है,
एक तू ही मेरे बाबा,
जीने का बहाना है,
जख्मी है ये दिल मेरा,
और घाव पुराना है,
मेरी भी सुनो मेरे श्याम,
कहता है ये दीवाना है,
‘गुड्डू’ तेरे चरणों में,
रखता अफसाना है,
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