
गणपति गणराज हमारे,
ओ सखी धीरे झुलैयो,
धीरे झुलैयो ओ सखी,
होले झुलैयो,
ओ सखी धीरे झूलाइयो.....
काहे के तो बने हैं पालना,
काहे की दोर लगायो,
धीरे झुलैयो रे,
सखी होल झूलाइयो,
चंदन के तोरे बने हैं पालना,
रेशम के दोर लगायो,
ओ शाखी धीरे झूलाइयो,
कौन झूले कौन झूलावे,
कौना आज चलो बलैया,
धीरे झूलाइयो रे,
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