
हे जगदम्बे माँ अम्बे, शरण म तोरे माता आये हव
हे जगदम्बे माँ अम्बे,हे जगदम्बे माँ अम्बे,
शरण म तोरे माता आये हव...
अपन बनाले माँ अम्बे, हिर्दय लगाले माँ अम्बे
खन खन चुरी छम छम पैरी,झम झम रेंगना सुहाये वो ॥
लाली के लुगरा सुघर अचरा,मोहनी रूप बनाये वो ॥
पांव म बिछिया माँअम्बे,कनिहा म करधन माँ दुर्गे ॥२॥
सोल्हा सिंगार मैं लाये हव...
अपन बनाले माँ अम्बे, हिर्दय लगाले माँ दुर्गे
मांग म लाली आखि म कजरा,कजरा गजब सुहाये वो ॥
रुच मुच हासे जगत प्रकासे,मनला सबके भाये वो ॥
काहा मैं खोजव माँ अम्बे, तोरे ठिकाना माँ दुर्गे २॥
तोरे जस पचरा मैं गावत हव...
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