
हे जग जननी हे दुःख हरनी मेरे आठों याम तुम्ही से है
हे जग जननी हे दुःख हरनी,
मेरे आठों याम तुम्ही से है,
तुम संग हो तो मंगल करनी,
हर सुख आराम तुम्ही से है।
तर्ज – ये चमक ये दमक।
हे जग माता तेरी ममता,
नहीं जग में कोई जिसकी समता,
करूँ हर पल तेरा शुक्र ओ माँ,
मेरी सुबहो शाम तुम्ही से है,
कैसे भूलू उपकार तेरा,
हर क्षण पाया है प्यार तेरा,
यश और वैभव सबकुछ संभव,
हर क्षण अविराम तुम्ही से है,
क्यों हो बेदर्द जहां का डर,
मुझ पर हर पल जब तेरी नजर,
कतराते थे जो उनके लब पर,
अब मेरा नाम तुम्ही से है,
इस अधमी में तूने क्या देखा,
बदली पल में किस्मत रेखा,
‘संजय’ का गुलशन अब मैया,
महका सरेआम तुम्ही से है,
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