
होरी में मेरे अइयो सांवरिया
अरे होरी में मेरे अइयो सांवरिया
अइयो सांवरिया अइयो सांवरिया
भाग मेंरे भी जगाइयो सावरिया
होरी में मेरे अइयो सांवरिया
बरस दीना में फागुन आयो
दर्शन को मनवा ललचायों
आकर दरस दिखाइयो सावरिया
अबकी बरस मत करियो बहाना
संग में रंग पिचकारी लाना
अरे प्रेम को रंग लगइयो सावरिया
मोह से सही ना जाए ये दूरी
तुम बिन प्यारे हो रही है अधूरी
अरे अब की ना बसो सांवरिया
तुम संग बांधी प्रीत की डोरी
चित्र विचित्र सखी की जोड़ी
अपने संग ले जइयो सांवरिया
रसिक संत बाबा श्री चित्र विचित्र बिहारी दास जी महाराज
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