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भगवान श्री कृष्ण के 25+ लोकप्रिय भजन Krishna

20
॥ श्री ॥

श्री कृष्ण भजन लिस्ट

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,

बजावै मुरली मधुर बाला ।

श्रवण में कुण्डल झलकाला,

नंद के आनंद नंदलाला ।

गगन सम अंग कांति काली,

राधिका चमक रही आली ।

लतन में ठाढ़े बनमाली

भ्रमर सी अलक,

कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की,

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,

देवता दरसन को तरसैं ।

गगन सों सुमन रासि बरसै ।

बजे मुरचंग,

मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग,

अतुल रति गोप कुमारी की,

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,

सकल मन हारिणि श्री गंगा ।

स्मरन ते होत मोह भंगा

बसी शिव सीस,

जटा के बीच,

हरै अघ कीच,

चरन छवि श्रीबनवारी की,

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,

बज रही वृंदावन बेनू ।

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू

हंसत मृदु मंद,

चांदनी चंद,

कटत भव फंद,

टेर सुन दीन दुखारी की,

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,

हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥

हे नाथ नारायण…॥

पितु मात स्वामी, सखा हमारे,

बंदी गृह के, तुम अवतारी

कही जन्मे, कही पले मुरारी

किसी के जाये, किसी के कहाये

है अद्भुद, हर बात तिहारी ॥

गोकुल में चमके, मथुरा के तारे

अधर पे बंशी, ह्रदय में राधे

बट गए दोनों में, आधे आधे

हे राधा नागर, हे भक्त वत्सल

सदैव भक्तों के, काम साधे ॥

वही गए वही, गए वही गए

जहाँ गए पुकारे

गीता में उपदेश सुनाया

धर्म युद्ध को धर्म बताया

कर्म तू कर मत रख फल की इच्छा

यह सन्देश तुम्ही से पाया

अमर है गीता के बोल सारे

त्वमेव माता च पिता त्वमेव

त्वमेव बंधू सखा त्वमेव

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव

त्वमेव सर्वं मम देव देवा

राधे कृष्णा राधे कृष्णा

राधे राधे कृष्णा कृष्णा॥

हरी बोल, हरी बोल,

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं,

राम नारायणं जानकी वल्लभं

कौन कहता है भगवान आते नहीं

तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,

बेरशबरी के जैसे खिलाते नहीं |

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,

माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं |

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,

तुम गोपी के जैसे नचाते नहीं |

सांवली सूरत पे मोहन,

दिल दीवाना हो गया ।

एक तो तेरे नैन तिरछे,

दूसरा काजल लगा ।

तीसरा नज़रें मिलाना,

एक तो तेरे होंठ पतले,

दूसरा लाली लगी ।

तीसरा तेरा मुस्कुराना,

एक तो तेरे हाथ कोमल,

दूसरा मेहँदी लगी ।

तीसरा मुरली बजाना,

एक तो तेरे पाँव नाज़ुक,

दूसरा पायल बंधी ।

तीसरा घुंगरू बजाना,

एक तो तेरे भोग छप्पन,

दूसरा माखन धरा ।

तीसरा खिचडे का खाना,

एक तो तेरे साथ राधा,

दूसरा रुक्मण खड़ी ।

तीसरा मीरा का आना,

एक तो तुम देवता हो,

दूसरा प्रियतम मेरे ।

तीसरा सपनों में आना,

हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी,

हे प्रिया पति, मैं करूँ आरती तेरी ।

तुझपे कान्हा, बलि बलि जाऊं,

सांझ सवेरे, तेरे गुण गाउँ,

प्रेम में रंगी, मैं रंगी भक्ति में तेरी ।

ये माटी का (मेरा) तन है तेरा,

मन और प्राण भी तेरे ।

मैं एक गोपी, तुम हो कन्हैया,

तुम हो भगवन मेरे ।।

कृष्ण, कृष्ण, कृष्ण रटे आत्मा मेरी ।

कान्हा तेरा रूप अनुपम,

मन को हरता जाये ।

मन ये चाहे हरपल अंखियां,

तेरा दर्शन पाये ।।

दरस तेरा, प्रेम तेरा, आस है मेरी ।

तुझपे ओ कान्हा बलि बलि जाऊं ।

देखो देखो ये गरीबी,ये गरीबी का हाल

कृष्ण के दर पे विश्वास लेके आया हूँ

मेरे बचपन का यार है.. मेरा श्याम,

यही सोच कर मै आस कर के आया हूँ.

अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो

के दरपे सुदामा गरीब आ गया है

भटकते भटकते ना जाने कहा से

तुम्हारे महल के करीब आगया है

ना सरपे है पगडी ना तन पे है जामा,

बतादो कन्हैया को नाम है सुदामा हा…

बतादो कन्हैया को नाम है सुदामा.

बस एक बार मोहन से जा कर के कह दो

के मिलने सखा बद‍नसीब आ गया है

अरे द्वारपालो कन्हैया से कहदो

के दरपे सुदामा गरीब आगया है

सुनते ही दौड़े चले आये मोहन,

लगाया गले से सुदामा को मोहन हा…

लगाया गले से सुदामा को मोहन

हुआ रुख्मिणी को बहुत ही अचंभा

ये मेहमान कैसा अजीब आगया है

बराबर में अपने सुदामा बिठाये

चरण आँसुओं से श्याम ने धुलाये

ना घबरायो प्यारे जरा तुम सुदामा

खुशी का समां तेरे करीब आ गया है

ज़ु ज़ु ज़ू ज़ु ज़ू ज़ु ज़ु ज़ु ज़ु ज़ू

यशोदा का नंदलाला बृज का उजाला है

मेरे लाल से तो सारा जग झिलमिलाए

रात ठंडी ठंडी हवा, गा के सुलाए

भोर गुलाबी पलकें, खोल के जगाए

दो अँखियों में तुझे बसाके

जाने कब से जागूँ

तू माँगे तो चाँद भी दे दूँ

तुझ से कुछ ना माँगूँ

खोल तू आँखें देख यहाँ हूँ

और नहीं कोई मैं तेरी माँ हूँ, ज़ु ज़ु ज़ू …

तेरे लिये कैसे कैसे सपने सजाए, मेरे लाल से …

जाने कब ये आती जाती

सांस कहाँ थम जाए

देख मुरझाता फूल टूट के

डाली से कब गिर जाए

तू जो मुझे माँ माँ … माँ, रहके बुलाए

रूह को मेरी चैन आ जाए, ज़ु ज़ु ज़ू …

सो जाए ऐसे फिर ना जागूँ जगाए, मेरे लाल से …

मनिहारी का भेस बनाया

श्याम चूड़ी बेचने आया

छलिया का भेस बनाया

झोली कंधे धरी इसमें चूड़ी भरी

गलियों में शोर मचाया

राधा ने सुनी ललिता से कही

मोहन को तुरत बुलाया

चूड़ी लाल नहीं पहनु

चूड़ी हरी नहीं पहनु

मुझे श्याम रंग है भाया

राधा पहनन लगी

श्याम पहनने लगे

राधा ने हाथ बढाया

राधा कहने लगी

तुम हो छलिया बड़े

धीरे से हाथ दबाया

छोटी छोटी गैया छोटे छोटे ग्वाल

छोटो सो मेरो मदन गोपाल

आगे आगे गैया पीछे पीछे ग्वाल

बिच में मेरो मदन गोपाल

कारी कारी गैया गोरे गोरे ग्वाल

श्याम बरन मेरो मदन गोपाल

घास खाए गैया दूध पिवे ग्वाल

माखन खावे मेरो मदन गोपाल

छोटी छोटी लकुटी छोटे छोटे हाथ

बंसी बजावे मेरो मदन गोपाल

छोटी छोटी सखिया मधुबन बाग

रास रचावे मेरो मदन गोपाल

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है

करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है

पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है

बिन मांगे हे कन्हैया हर चीज मिल रही है

अब क्या बताऊ मोहन आराम हो रहा है

मेरी जिंदगी में तुम हो किस बात की कमी है

मुझे और अब किसी की परवाह भी नही है

तेरी बदौलतो से सब काम हो रहा है

दुनिया में होंगे लाखो तेरे जैसा कौन होंगा

तुज जैसा बंदा परवर भला ऐसा कौन होगा

अरे थामा है तेरा दामन आराम हो रहा है

है आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे,

है शीश जो प्रभु चरण में वंदन किया करे।

बेकार वो मुख है जो रहे व्यर्थ बातों में,

मुख है वोजो हरीनाम का सुमिरन किया करे॥

हीरेमोती से नहीं शोभा है हाथकी।

है हाथ जो भगवान् का पूजन किया करे॥

मर के भी अमरनाम है उस जीवका जग में।

प्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे॥

ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन,

वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी॥

महलों में पली बन के जोगन चली।

मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥

वो तो गली गली गली हरी गुण गाने लगी॥

कोई रोके नहीं कोई टोके नही

मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी।

बैठी संतो के संग रंगी मोहन के रंग

मीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी।

राणा ने विष दिया मानो अमृत पिया,

मीरा सागर में सरिता समाने लगी।

दुःख लाखों सहे मुख से गोविन्द कहे,

कर्मण्येवाधिकारस्ते

भज गोविन्दम्

श्री हरि स्तोत्रम्

कितना प्यारा है श्रृंगार

श्री गोवर्धन महाराज

बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे

फूलों में सज रहे हैं

कभी राम बनके कभी श्याम बनके

राधे राधे

मैं आरती तेरी गाऊं

कृष्णा कृष्णा है

एक राधा एक मीरा

श्री जगन्नाथ आरती

मैं तो आई वृन्दावन धाम

श्रीकृष्ण शरणाष्टक

श्याम तेरी बंसी

पुकारे राधा नाम

श्याम तेरी बंसी, पुकारे राधा नाम

लोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम ।।

सांवरे की बंसी को बजने से काम

राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम

जमुना की लहरे बंसीबट की छैय्या,

किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैय्या ।

श्याम का दिवाना तो सारा बृजधाम

कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाये

जिसके मन भाए ये उसी के गुण गाये ।।

जिसके मन भाए वो उसी के गुण गाये ।

कौन नहीं कौन नहीं बंसी की धुन का गुलाम,

राधा का भी श्याम हो तो मीरा का भी श्याम ।।

श्याम तेरी बंसी कन्हैया तेरी बंसी पुकारे राधा नाम ।

राधे राधे जपो चले आयंगे बिहारी,

आयेंगे बिहारी, चले आयेंगे बिहारी,

पाछे पाछे डोले होके बाँवरो मुरारी,

राधा नाम जिव्हा पे मन में मुरारी ,

राधा पे तन मन वारे गिरिधारी,

राधा कारण मोर बन नाचतें मुरारी,

चरण दबाए सेवा कुञ्ज में गोपाला,

पाछे पाछे डोले बरसाने में बिहारी,

एक बार राधा कहो ऋणी हो मुरारी,

राधा जी कहे भव तार दे बिहारी,

राधा के इशारे नाचे रास बिहारी,

तोरा मन दर्पन कहलाये

प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधी पाऊँ

तोहे प्रभु कहे तु मन को पा ले, पा जयेगा मोहे

तोरा मन दर्पण कहलाये – २

भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये

मन ही देवता, मन ही ईश्वर,

मन से बड़ा न कोय मन उजियारा

जब जब फैले, जग उजियारा होय

इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये

सुख की कलियाँ, दुख के कांटे,

मन सबका आधार मन से कोई बात छुपे ना,

मन के नैन हज़ार जग से चाहे भाग लो कोई,

मन से भाग न पाये

तन की दौलत ढलती छाया

मन का धन अनमोल तन के कारण

मन के धन को मत माटि मेइन रौंद

मन की क़दर भुलाने वाला हीराँ जनम गवाये

तोरा मन दर्पण कहलाये

किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।

जुबा पे राधा राधा राधा नाम हो जाए॥

जब गिरते हुए मैंने तेरे नाम लिया है।

तो गिरने ना दिया तूने, मुझे थाम लिया है॥

तुम अपने भक्तो पे कृपा करती हो, श्री राधे।

उनको अपने चरणों में जगह देती हो श्री राधे।

तुम्हारे चरणों में मेरा मुकाम हो जाए॥

मांगने वाले खाली ना लौटे, कितनी मिली खैरात ना पूछो।

उनकी कृपा तो उनकी कृपा है, उनकी कृपा की बात ना पूछो॥

ब्रज की रज में लोट कर, यमुना जल कर पान।

श्री राधा राधा रटते, या तन सों निकले प्राण॥

गर तुम ना करोगी तो कृपा कौन करेगा।

गर तुम ना सुनोगी तो मेरी कौन सुनेगा॥

डोलत फिरत मुख बोलत मैं राधे राधे, और जग जालन के ख्यालन से हट रे।

जागत, सोवत, पग जोवत में राधे राधे, रट राधे राधे त्याग उरते कपट रे॥

लाल बलबीर धर धीर रट राधे राधे, हरे कोटि बाधे रट राधे झटपट रे।

ऐ रे मन मेरे तू छोड़ के झमेले सब, रट राधे रट राधे राधे रट रे॥

श्री राधे इतनी कृपा तुम्हारी हम पे हो जाए।

किसी का नाम लूँ जुबा पे तुम्हारा नाम आये॥

वो दिन भी आये तेरे वृन्दावन आयें हम, तुम्हारे चरणों में अपने सर को झुकाएं हम।

ब्रज गलिओं में झूमे नाचे गायें हम, मेरी सारी उम्र वृन्दावन में तमाम हो जाए॥

वृन्दावन के वृक्ष को, मर्म ना जाने कोई।

डार डार और पात पात में, श्री श्री राधे राधे होए॥

अरमान मेरे दिल का मिटा क्यूँ नहीं देती, सरकार वृन्दावन में बुला क्यूँ नहीं लेती।

दीदार भी होता रहे हर वक्त बार बार, चरणों में अपने हमको बिठा क्यूँ नहीं लेती॥

श्री वृन्दावन वास मिले, अब यही हमारी आशा है।

यमुना तट छाव कुंजन की जहाँ रसिकों का वासा है॥

सेवा कुञ्ज मनोहर निधि वन, जहाँ इक रस बारो मासा है।

ललिता किशोर अब यह दिल बस, उस युगल रूप का प्यासा है॥

मैं तो आई वृन्दावन धाम किशोरी तेरे चरनन में।

किशोरी तेरे चरनन में, श्री राधे तेरे चरनन में॥

ब्रिज वृन्दावन की महारानी, मुक्ति भी यहाँ भारती पानी।

तेरे चन पड़े चारो धाम, किशोरी तेरे चरनन में॥

करो कृपा की कोर श्री राधे, दीन जजन की ओर श्री राधे।

मेरी विनती है आठो याम, किशोरी तेरे चरनन में॥

बांके ठाकुर की ठकुरानी, वृन्दावन जिन की रजधानी।

तेरे चरण दबवात श्याम, किशोरी तेरे चरनन में॥

मुझे बनो लो अपनी दासी, चाहत नित ही महल खवासी।

मुझे और ना जग से काम, किशोरी तेरे चरण में ॥

किशोरी इस से बड कर आरजू -ए-दिल नहीं कोई।

तुम्हारा नाम है बस दूसरा साहिल नहीं कोई।

तुम्हारी याद में मेरी सुबहो श्याम हो जाए॥

यह तो बता दो बरसाने वाली मैं कैसे तुम्हारी लगन छोड़ दूंगा।

तेरी दया पर यह जीवन है मेरा, मैं कैसे तुम्हारी शरण छोड़ दूंगा॥

ना पूछो किये मैंने अपराध क्या क्या, कही यह जमीन आसमा हिल ना जाये।

जब तक श्री राधा रानी शमा ना करोगी, मैं कैसे तुम्हारे चरण छोड़ दूंगा॥

बहुत ठोकरे खा चूका ज़िन्दगी में, तमन्ना तुम्हारे दीदार की है।

जब तक श्री राधा रानी दर्शा ना दोगी, मैं कैसे तुम्हारा भजन छोड़ दूंगा॥

तारो ना तारो मर्जी तुम्हारी, लेकिन मेरी आखरी बात सुन लो।

मुझ को श्री राधा रानी जो दर से हटाया, तुम्हारे ही दर पे मैं दम तोड़ दूंगा॥

मरना हो तो मैं मरू, श्री राधे के द्वार,

कभी तो लाडली पूछेगी, यह कौन पदीओ दरबार॥

आते बोलो, राधे राधे, जाते बोलो, राधे राधे।

उठते बोलो, राधे राधे, सोते बोलो, राधे राधे।

हस्ते बोलो, राधे राधे, रोते बोलो, राधे राधे॥

दोनों ने श्याम को चाहा,

अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो,

एक प्रेम दीवानी एक दरस दीवानी ।

राधा ने मधुबन में ढूँढा,

मीरा ने मन में पाया,

राधा जिसे खो बैठी वो गोविन्द,

मीरा हाथ बिक आया,

एक मुरली एक पायल,

एक पगली एक घायल,

अंतर क्या दोनों की प्रीत में बोलो,

एक सूरत लुभानी एक मूरत लुभानी,

मीरा के प्रभु गिरिधर नागर,

राधा के मनमोहन,

सा गा मा पा धा

पा धा मा पा रे मा गा

धा रे सा नि धा रे रे गा मा

गा पा मा पा धा पा सा नी सा रे

राधा नित श्रृंगार करे और,

मीरा बन गयी जोगन,

एक रानी एक दासी,

दोनों हरी प्रेम की प्यासी,

अंतर क्या दोनों की तृप्ति में बोलो,

एक जीत न मानी एक हार न मानी,

मेरे जीवन की जुड़ गयी डोर, किशोरी तेरे चरणन में ।

किशोरी तेरे चरणन में, महारानी तेरे चरणन में ।।

तेरी ऊँची अटारी प्यारी, मैं वारी तेरी गलियन पे ।

मेरी जीवन की हो जाये भोर, किशोरी तेरे चरणन में ।।

तू एक इशारा कर दे, मई दौड़ी आऊं बरसाने ।

मैं तो नाचूं बन कर मोर, किशोरी तेरे चरणन में ।।

मेरा पल में भाग्य में बदलदे इशारा तेरी करुणा का ।

मेरे जन्मों की कट जाए डोर, किशोरी तेरे चरणन में ।।

थक सा गया हूँ जगत झंझट में स्वामिनी बाल में तुम्हारा,

भाव सागर में डूब रहा है सूजत नाही किनारा ।

ऐसे दीन अनाथ को तुम को कौन सहारा,

आओ और पकड़ लो उंगली अपना जान दुलारा ।।

मेरी आहों से झोली भर दे तू बस जा तन मन में ।

मुझे ढूंढें नन्द किशोर, किशोरी तेरे चरणन में ।।

सपने में रात में आया, मुरली वाला री ।

मेरे दिल में बस गयो, श्याम जपू मैं माला री ।।

वो बोला सुन मेरी राधा, मैं तेरे बिना हूँ आधा ।

मेरी बंसी तुझे पुकारे, आ दौड़ी यमुना किनारे ।।

मुझे ग्वाल बाल में प्यारा, कृष्ण वो काला री ।

वो झूले कदम की डारी, मैं संग में झूलन वारी ।

रंग रसिया श्याम मुरारी,

करे मीठी बतिया प्यारी ।।

जादू सा मो पे करता, वो नंद लाला री ।

मेरे दिल में बस गयो,

श्याम जपू मैं माला री ।।

मेरा हाथ पकड़ के डोले, नैनन की भाषा बोले ।

मैं हो गयी श्याम दीवानी,

मोहे दे गयो खास निशानी ।।

मेरा खो गयो खेलन में, कान का बाला री ।

वो नटखट नन्द किशोरा, छलिया गोकुल का छोरा ।

सपने में आन सतावे,

फिर चैन मुझे न आवे ।।

मेरे मन का कमल खिलावे, श्याम गोपाला री ।

दिल दीवाना हो गया मेरा,

तिसरा नजरें मिलाना,

तिसरा तेरा मुस्कुरना,

तिसरा बंसी बजाना,

तिसरा घुँघरू बजाना,

बांके बिहारी लाल,

तेरी जय होवे,

भक्तन के रखपाल,

जय होवे तेरी जय होवे,

चारों वेद तेरा जस गावे,

नेती नेती सदा पुकारे,

फिर भी ना पावे पार,

दुःख संकट के तुम रखवारे,

भक्तन की आँखों के तारे,

दूर करो अंधकार,

हम दुखियारे द्वार तिहारे,

रेन दिना यह विनय पुकारे,

करे भव सागर से पार,

हम पागल है दुनिया वाले,

स्वार्थ के है सब मतवाले,

अब तो आकर थाम,

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने

क्या जाने कोई क्या जाने

छवि लगी मन श्याम की जब से

भई बावरी मैं तो तब से

बाँधी प्रेम की डोर मोहन से

नाता तोड़ा मैंने जग से

ये कैसी पागल प्रीत ये दुनिया क्या जाने

ये कैसी निगोड़ी प्रीत ये दुनिया क्या जाने

मोहन की सुन्दर सूरतिया

मन में बस गयी मोहनी मूरतिया

जब से ओढ़ी शाम चुनरिया

लोग कहे मैं भई बावरिया

मैंने छोड़ी जग की रीत ये दुनिया क्या जाने

हर दम अब तो रहूँ मस्तानी

लोक लाज दीनी बिसरानी

रूप राशि अंग अंग समानी

हे रत हे रत रहूँ दीवानी

मई तो गाऊँ ख़ुशी के गीत ये दुनिया क्या जाने

मोहन ने ऐसी बंसी बजायी

सब ने अपनी सुध बिसरायी

गोप गोपिया भागी आई

लोक लाज कुछ काम न आई

फिर बाज उठा संगीत ये दुनिया क्या जाने

भूल गयी कही आना जाना

जग सारा लागे बेगाना

अब तो केवल शाम सुहाना

रूठ जाये तो उन्हें मनाना

अब होगी प्यार की जीत ये दुनिया क्या जाने

हम प्रेम नगर की बंजारन

जप तप और साधन क्या जाने

हम शाम के नाम की दीवानी

नित नेम के बंधन क्या जाने

हम बृज की भोली गंवारनिया

ब्रह्म ज्ञान की उलझन क्या जाने

ये प्रेम की बाते है उद्धव

कोई क्या समझे कोई क्या जाने

मेरे और मोहन की बातें

या मै जानू या वो जाने

शाम तन शाम मन शाम हैं हमारो धन

आठो याम पूछो हमें शाम ही सो काम हैं

शाम हिये शाम पिए शाम बिन नाही जिए

आंधें की सी लाकडी आधार शाम नाम है

शाम गति शाम मति शाम ही हैं प्राणपति

शाम सुख दायी सो भलाई आठो याम हैं

उद्धव तुम भये बवरे पाथी ले के आये दोड़े

हम योग कहा राखे यहाँ रोम रोम शाम है

राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा, श्याम देखा, घनश्याम देखा,

ओ बंसी बजाते हुए, ओ राधा तेरा श्याम देखा॥

राधा तेरा श्याम हमने मथुरा मैं देखा, बंसी बजाते हुए,

ओ राधा तेरा श्याम देखा॥

राधा तेरा श्याम हमने गोकुल मैं देखा

गैया चराते हुए ओ राधा तेरा श्याम देखा॥

राधा तेरा श्याम हमने वृन्दावन मैं देखा

रास रचाते हुए ओ राधा तेरा श्याम देखा॥

राधा तेरा श्याम हमने गतिपुरा मैं देखा,

गोवर्धन उठाते हुए ओ राधा तेरा श्याम देखा॥

राधा तेरा श्याम हमने सर्वजगत मैं देखा,

राधा राधा जपते हुए, ओ राधा तेरा श्याम देखा॥

श्याम देखा, घनश्याम देखा, ओ बंसी बजाते हुए,

ओराधा तेरा श्याम देखा॥

राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा

राधे राधे जपो चले आएँगे बिहारी,

राधे राधे रटो चले आएँगे बिहारी,

आएँगे बिहारी चले आएँगे बिहारी,

राधा मेरी चंदा,

चकोर है बिहारी,

राधा रानी मिश्री,

तो स्वाद है बिहारी,

राधा रानी गंगा,

तो धार है बिहारी,

राधा रानी तन है तो,

प्राण है बिहारी,

राधा रानी सागर,

तरंग है बिहारी,

राधा रानी मोहनी,

तो मोहन बिहारी,

तो मोहन है बिहारी,

राधा मेरी गोरी तो,

साँवरे बिहारी,

राधा रानी भोली भाली ,

चंचल बिहारी,

राधा रानी नथनी,

तो कंगन बिहारी,

राधा रानी मुरली,

तो तान है बिहारी,

मोर मुकुट तेरे हाथों में बांसुरीया,

देवी देवता सब नर और नारी,

जाएं बलिहारी बलिहारी ।

सांवली सूरत तेरी तिरछी रे नजरिया,

मन में है बसी तेरी बांकी छवि,

मेरे गिरधारी गिरधारी ।

ऐसी अलबेली ऐसी प्यारी,

छवि अलबेली श्याम की,

श्याम के रंग में रंग दी है काया,

लगन लगी तेरे नाम की,

राह पकड़ ली हमने कन्हैया ,

अब तो तेरे धाम की,

अबे नहीं छूटे तेरे दर की डगरिया,

सूरदास के छोटे ललना,

मीरा के भरतार हो,

राधा के हो प्रेमी प्रीतम,

संतो के तारणहार हो,

अर्जुन के तुम बने सारथी,

भक्तों के दातार हो,

जैसे भाव वैसे देखे रे सांवरिया,

गोपी गवाल संग धेनु चरावे,

माखन चोर गोपाल रे,

कुंज गली में रास रचाये,

नटखट श्री नंदलाल रे,

चीर चुराये रे मटकी गिराये,

बैठे कदम की डाल रे,

लीला तेरी देख के,

मन रे बांवरिया ,

नाता हमारा जन्मो पुराना,

तू रहना मेरे साथ मे,

चाहे दुनिया हाथ छोड़ दे,

तू न छोड़ना मेरा हाथ रे ,

पार भवर से नाव लगा दे,

जगदीश्वर भगवान रे,

चरणों मे तेरे मेरी,

बीती रे उमरिया,

सजा दो घर को गुलशन सा ।

मेरे सरकार आये है ।।

लगे कुटिया भी दुल्हन सी ।

पखारो इनके चरणो को,

बहा कर प्रेम की गंगा ।

बिछा दो अपनी पलको को,

सरकार आ गए है,

मेरे गरीब खाने मे,

आया है दिल को सुकून,

उनके करीब आने में ।

मुद्द्त से प्यासी अखियो को,

मिला आज वो सागर,

भटका था जिसको पाने के,

खातिर इस ज़माने में ।।

उमड़ आई मेरी आँखे,

देख कर अपने बाबा को ।

हुई रोशन मेरी गलियां,

तुम आकर फिर नहीं जाना,

मेरी इस सुनी दुनिया से ।

कहूँ हर दम यही सब से,

॥ जय हो ॥

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About this bhajan

Meaning, tradition and how to sing it

भगवान श्री कृष्ण के 25+ लोकप्रिय भजन Krishna Bhajan Lyrics is a bhajan dedicated to Krishna Ji, sung in homes, temples, and community sabhas across India.

The bhajan opens with the line "Shrii krishna bhajan list", a verse devotees often recite while lighting the evening lamp or gathering for kirtan.

On this page you can read the complete lyrics in Hindi (Devanagari), Hinglish (Roman transliteration), English translation. Use the language toggle above to switch scripts, adjust the font size for comfortable reading, and save the bhajan to revisit during your next sabha or solo practice.

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