
जय श्री विष्णु जगत के पालक भक्तन हितकारी
ध्यावत गण गन्धर्व सर्वदा सुर-नर-नारी
इच्छा से तिरलोक रचा है माया विस्तारी
पावत न कहू भेद आपका सुर मुनि तप धारी
व्यापक आप चराचर सबमें शक्ति भारी
ज्याति महान तुमारी छाई उजियारी
जय श्री विष्णु भगवान
पालन करता जगत के स्वामी तुम अति उपकारी
कहत निगम कर जोड़ विनय के धन धन असुरारी
जय श्री विष्णु के पालक भक्तन हितकारी
रचा है सृष्टि
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं
कर्मण्येवाधिकारस्ते
भज गोविन्दम्
श्री हरि स्तोत्रम्
कितना प्यारा है श्रृंगार
श्री गोवर्धन महाराज
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी
बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे
फूलों में सज रहे हैं
राधे राधे
मैं आरती तेरी गाऊं
एक राधा एक मीरा
श्री जगन्नाथ आरती
मैं तो आई वृन्दावन धाम
श्रीकृष्ण शरणाष्टक
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