
Asur Nikandan Bhay Bhanjan Kuch Aan Karo
असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो
पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो
भीड़ पड़ी अब भारी हे बजरंगबली
भक्तो के दुःख दूर मेरे हनुमान करो
गयारवे हो रूध्र तुम हो ले के अवतारी
ज्ञानियो में आप ग्यानी योधा बलशाली
बाल अवस्था में चंचल आप का था मन
सूर्य को तुम खा गए नटखट बड़ा बचपन
मैं हूँ निर्बल बल बुद्धि का दान करो
श्री राम का तुम सा ना सेवक और है दूजा
आज घर घर में तुम्हारी हो रही पूजा
दीन दुखिओं की कतारें द्वार पे लम्बी
आप की महिमा को सुन कर आया मैं भी
अपने भक्तों का बजरंगी मान करो
हे बजरंगी अब दया की कीजिये दृष्टि
गा रही महिमा तुम्हारी यह सारी सृष्टि
आपकी कृपा हो जिसपे राम मिले उसको
बेदड़क आया ‘लक्खा’ अब और कहूँ किसको
दया की दृष्टि तुम मुझपर बलवान करो
हनुमान जी की आरती
हनुमान चालीसा
हे दुःख भंजन मारुती नंदन
जय बोलो जय बोलो जय हनुमान की
हनुमानाष्टक
कहत हनुमान जय श्री राम
हनुमान गायत्री मन्त्र
जय जय राम
जय जय राम भक्त हनुमान
हनुमान जब चले
लेके संजीवनी संकट को मिटाने आजा
हनुमान बाहुक
हनुमान गाथा
भूत पिशाच निकट नहीं आये
तेरी महिमा जग में अपार
कहे श्री राम सुनो हनुमान
दुनियाँ रचने वाले को भगवान कहते हैं
जो खेल गए प्राणो पे श्री राम के लिए
बालाजी जाऊं कहाँ
राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते
चलो चलिए बागेश्वर धाम
राम की मुंदरी लाये जब हनुमान
जिस पर हो हनुमान की कृपा
जय हो जय हो तुम्हारी बजरंगबली
उठे तो बोले राम बैठे तो बोले राम
मनोजवम मारुत तुल्य वेगम
हनुमत डटे रहो आसन पर
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