
Chal Jaaye Vyapar To Khatu Ho Aao
चल जाए व्यापार, तो खाटू हो आयो,
जुड़ जाए पैसे चार, तो खाटू हो आओ ।
एक तेरे नाम बिना, मेरे कान्हाँ
मन्नू कौन गरीब नू जाणदा ए,
लंघ पार जावा तेरा नाम लेके,
मेनू आसरा तेरे नाम दा ए,
जो बात दवा से हो न सके
वो बात दुआ से होती है।
जब कामिल मुर्शद मिलता है,
तो बात खुदा से होती है।
जहाँ चलता था न कुछ काम तीरों से,
कमानों से,
विजय नटवर की होती थी
वहां बंसी की तानों से।
यारा वे, यारा वे, यारा वे, यारा वे यारा,
चल जाए व्यापार, तो खाटू हो आओ,
खुश रहे परिवार तो खाटू हो आओ,
लेके रिश्तेदार खाटू हो आओ,
चढ़ मस्ती यार तो खाटू हो आओ,
सज जाए बस्ती यार तो खाटू हो आओ,
ना गौरे का, ना काले का,
घनश्याम मुरली वाले का,
मैं लाडला खाटू वाले का,
भारत में राजस्थान है,
जयपुर जिसकी शान है,
जयपुर के पास ही रींगस है,
रिंगस में उड़दा निशान है,
निशान उठाने वाले का,
राजी लखदातार तो खाटू हो आओ,
मुकुट जयपुर से है मंगवाया,
साथ सोने का छत्तर भी लाया,
हाथ में चूरमे की थाली,
साथ में टाबर और घरवाली,
भगत जो सांचे, वही तो नाचे,
धूम उठा के जाऊँगा,
दर पे आया पहली बारी,
सुण के तेरी महिमा भारी,
श्याम मैं खाटू में आया,
कुरता पाजामा कदी ना पहना,
वो भी पहन के आया,
माला मनका कदी ना फेरी,
वो भी फेर के आया,
गले में लटके, शाम के पटके,
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