
ऊँचे पर्वत वाली मैया है निराली
मेरी मैया चामुंडा शिखर पर घणी विराजी रे
मेरी मैया माँ तुलजा शिखर पर घणी विराजी रे
घणी विराजी रे ओ मैया तू तो घणी विराजे रे
नटकासुर दानव जब आया
भगतो और संतो को सताया
उस तारने जब भगतो ने जगदम्बा को बुलाया
माँ चामुंडा तुलजा भवानी हो
माँ चामुंडा तुलजा भवानी तबसे यहाँ विराजी रे
ओ ओ ओ ओ ओ ..................................
जो आये दर तेरे मैया उसकी झोली भरती हो मैया
ऐसा दर कही जग में देखा नहीं निराला
जहाँ विराजी साथ में दोनों
चामुंडा तुलजा भवानी रे
तुम तो जग की पालनकर्ता तुम्ही हो मेरी मैया करता धर्ता
तुमसे बढ़कर कोई नहीं है इस दुनिया में खिवैया
मेरी नैया पार लगाओ हो
मेरी नैया पार लगाओ बिच भवर में डोली रे
शिखर पर घणी विराजी रे शिखर पर घणी विराजी रे
माँ शैलपुत्री की कथा
माँ ब्रह्मचारिणी की कथा
ब्रह्मचारिणी माता की कथा
माँ तुमको आना है
मैया को चूनर ओढ़ाएं
कलयुग की वाणी
जय हो माई की
सोणा दरबार
नवराता आया है माँ का
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