
हे मातृभूमि! हमको वर दो He Matrubhuoomi Humko Var Do
हे मातृभूमि! हमको वर दो, पढ-लिखकर हम गुनना सीखें
बोले न बुरा, देखे न बुरा, कुछ भी बुरा न सुनना सीखे
हम खेल-खेल पढ़ते जाएँ, पढ़-लिखकर नित बढ़ते जाएँ
हम रुके नही, हम झुके नही, गिरी शिखिरो पर चढ़ते जाएँ
विघ्नों से कभी न घबराएँ, सतपंथ को कभी न छोड़े हम
बाधाओं पर बाधा आएँ, बाधाओं का रुख मोड़े हम
क्यों बने फ़क़ीर लकीरो के, नित नए सपने बुनना सीखें
हे मातृभूमि! हम को वर दो, पढ़-लिखकर हम गुनना सीखें
पाकर आशीष तुम्हारा मां, आलोक जगत में हम भर दे
हम वीरानों को चमन करे, जो गूंगे हैं उनको स्वर दे
अपनापन सब में देखे हम, मन से द्वेष मिटाओ हम
पर सुख को अपना सुख माने, पर दुःख में हाथ बटाएं हम
जग की इस सुंदर बगीया से हम, सार सुमन चुनना सीखें
बृहस्पति देव की आरती
लक्ष्मी चालीसा
श्री सूर्य देव आरती
करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं
गणपति अथर्वशीर्ष
शिव ताण्डव स्तोत्र
मैली चादर ओढ़ के
कृष्णा कृष्णा है
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