
कैसे सुमरु देवी जालपा हो माँ ।।
महिषासुर एक दानव रे, जग हो गया प्रचंड,
धरती के नौ खंड जीत लियो,
जीत लियो इंद्रासन ।। कैसे सुमरु ।।
ब्रम्हा विष्णु सदा शिव , सुर मुनि करतार,
जोत कला वो सब हारी,
कोई पार न पाये ।। कैसे सुमरु ।।
सकल देव उठ भागेरे, माई दुर्गा के पास ।
तू मेरी आदि भवानी,
मैया रखो अब लाज ।। कैसे सुमरु ।।
इतनी सुन उठ गरजी रे, हाथ ले लई तलवार ।
लुंगरा ने सिगला पलनों ,
दुर्गा हो गई असवार ।। कैसे सुमरु ।।
कौन वरण मई दुर्गा रे, काहे पे असवार ।
कौन वरण महिषासुर,
काहे पे असवार ।। कैसे सुमरु ॥
लाल वरण मई दुर्गा रे, सिंघला पे असवार ,
कारो वरण महिषासुर,
भैसा पे असवार ।। कैसे सुमरु ।।
तू मेरी आदि भवानी, रख लईयो मेरी लाज ।
बेगीराम जस गावे ,
मैया तेरो दरबार ।। कैसे सुमरु ।।
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