
सूरासम्पूर्णकलशम
रुधिराप्लुतमेव च
दधाना हस्तपध्माभ्याम
कुष्मांडा शुभदास्तु मे
ॐ जय कूष्मांडा माँ
मैया जय कूष्मांडा माँ
शरण तिहारी आए
कर दो माता दया
जय जय कूष्मांडा माँ
अष्टभुजा जय देवी
अदिशक्ति तुम माँ
मैया आदिशक्ति तुम माँ
आदिस्वरुपा मैया
जग तुमसे चलता
चतुर्थ नवरात्रों में
भक्त करे गुणगान
मैया भक्त करे गुणगान
स्थिर मन से माँ की
करो पूजा और ध्यान
सच्चे मन से जो भी
करे स्तुति गुणगान
सभी करे स्तुति गुणगान
सुख समृद्धि पावे
माँ करे भक्ति दान
शेर है माँ की सवारी
कमंडल अति न्यारा
माँ कमंडल अति न्यारा
चक्र पुष्प गल माला
माँ से उजियारा
ब्रम्हाण्ड निवासिनी
महिमा वेद कहे
मैया महिमा वेद कहे
दास बनी है दुनिया
माँ से करुणा बहे
पाप ताप मिटता है
दोष ना रह जाता
मैया दोष ना रह जाता
जो माता में रमता
निश्चित फल पाता
अष्टसिद्धियां माता
भक्तों को दान करे
मैया भक्तों को दान करे
व्याधि मैया हरती
सुखों से पूर्ण करे
कूष्मांडा माता की
आरती नित गाओ
सब आरती नित गाओ
माँ करेगी सब संभव
माँ चरण सदा ध्याओ
दुर्गा आरती
दुर्गा चालीसा
शेर पे सवार होके
बेटा जो बुलाए माँ को आना चाहिए
माँ शेरावालिये
आ माँ आ
अटल छत्र सच्चा दरबार
चलो बुलावा आया है
मेरे नैनों की प्यास बुझा दे
बिगड़ी मेरी बना दे
सावन की रुत है
लाल लाल चुनरी
धरती गगन में होती है
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे
बारिशों की छम छम में
या देवी सर्वभूतेषु
एक बार माँ आ जाओ
लाल चुनरिया
जगदाती पहाड़ों वाली माँ
आरती जगजननी तेरी गाऊं
रण में कूद पड़ी महाकाली
मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे
नन्हे नन्हे पाँव मेरे
जगदम्बिके जय जय
मेरी आस तू है विश्वास तू है माँ
आओ मेरी शेरावाली माँ
एक युग से मैं तरसा शेरावालिये
मुझको ये विश्वास है मैया
लाली लाली लाल चुनरिया
करे भगत हो आरती
स्वर्ग से सुंदर भवन है माँ का
संकटा माता आरती
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