
क्या लेके आया बंदे Kya Leke Aaya Bande Kya Leke Jayega
क्या लेके आया बंदा
क्या लेके जायेगा
दो दिन की जिन्दगी है
दो दिन का मेला
इस जगत सराऐ में
मुसाफीर रहना दो दिन का
क्यों विर्था करे गुमान
मुरख इस धन और जोबन का
बंद मुट्ठी आया जग में
खाली हाथ जाएगा
हे कदे गए बलवान
तीन बार धरती तोलणियाँ
ज्यारी एडी पड़ती धाक
नाही कोई शामें बोलणियाँ
निर्भय डोलणियाँ वे तो
गया रे अकेला
नहीं छेड़ सका कोई
माया गिणी गिणाई रे
गढ किला री निव छोड़ गया
चिणी चिणाई रे
चिणी रे चिणाई रह गई
गया है अकेला
इस काया का है भाग्य
भाग्य बिन पाया नहीं जाता
कहे शर्मा बिना नसिब
तोड़ फल खाया नहीं जाता
भवसागर से तर ले बन्दे
हरी गुण गायले
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