
मैं बरसाने की छोरी Main Barsane Ki Chhori
मैं बरसाने की छोरी
ना कर मोसे बरजोरी
तू कारो और मैं गोरी
अपनों मेल नहीं
मैं तोसे बांधू प्रीत की डोरी
करता खेल नहीं।।
शुक्र करो की पड़े नहीं
यशोदा माँ के डंडे
एक डांट में है जाते
अरमान तुम्हारे ठन्डे
मैं नन्द बाबा का लाला
मैं तो ना डरने वाला
तेरा पड़ा हैं मुझसे पाला
मैं गुजरी तू गवाला
जहाँ जहाँ मैं जाती हूँ
क्यों पीछे पीछे आए
तेरो मेरो मेल नहीं
यह कौन तुम्हे समझाए
तू मुझको ना पहचानी
पिया घाट घाट का पानी
मैं दरिया हूँ तूफानी
अरे ना कर मोसू शैतानी
ऐसी वैसी नार नहीं क्यों
मोपे डोरे डाले
बीच डगर में छोड़ सतानो
ओ गोकुल के ग्वाले
मेरा रोज का आना जाना
नरसी का माखन खाना
‘शर्मा’ है श्याम दीवाना
अरे तू गोकुल मैं बरसानो
कर्मण्येवाधिकारस्ते
भज गोविन्दम्
श्री हरि स्तोत्रम्
कितना प्यारा है श्रृंगार
श्री गोवर्धन महाराज
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी
बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे
फूलों में सज रहे हैं
राधे राधे
मैं आरती तेरी गाऊं
एक राधा एक मीरा
श्री जगन्नाथ आरती
मैं तो आई वृन्दावन धाम
श्रीकृष्ण शरणाष्टक
तुझसा दयालु नहीं प्यारे
दुनिया से मैं हारा
मेरा आपकी कृपा से
पकड़ लो हाथ बनवारी
तेरा संकट सारा हर लेंगे
जय जय राधा रमन हरि बोल
कीर्तन की है रात
हे विष्णु विधाता
सांवरे को दिल में बसाकर तो देखो
हरे कृष्णा हरे रामा
मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो
मन बसिया
जिस के घर में खाटू वाले की
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
छाप तिलक सब छीनी रे
सजा दो घर को गुलशन सा
कन्हैया वे
नाम है तेरा तारण हारा
श्री गोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्रम्
हे श्याम ध्वजा बंदधारी
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
आरती भानु दुलारी की
कौन कहते हे भगवान आते नहीं
मेरे कान्हा
ॐ जय जगदीश हरे
काली कमली वाला
इतना तो करना स्वामी
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