
होठों पे दुआ रखना राहों में नजर रखना
होठों पे दुआ रखना,
राहों में नजर रखना,
शायद वो आ जाए,
दरवाजा खुला रखना।।
यहाँ जोर नहीं चलता,
मर्जी के मालिक हैं,
मिन्नत ही किए जाना,
फरियाद किए जाना।
हो जाए कभी करुणा,
तशरीफ़ वो ले आए,
चरणों से लिपट रहना,
अशको से धो देना।
शर्माना ना अपने हैं,
आवाज दिए जाना,
आंगन को सजा रखना,
स्वर – श्री रविनंदन शास्त्री जी।
प्रेषक – नितीश
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