
मनोजवम मारुत तुल्य वेगम, जितेंद्रियम बुद्धिमतां वरिष्ठं
वातात्मजं वानारायूथ मुख्यम, श्रीराम दूतं शरणम प्रपद्धे
मंगल मूरति, मारुतनंदन, भक्तविभूषण जय हनुमान
सकल अमंगल, मूल निकंदन, संकट मोचन जय हनुमान
जय हनुमान जय हनुमान
जय हनुमान जय हनुमान, जय हनुमान जय हनुमान
पवन तनय संतन हितकारी, ह्रदय बिराजत अवधविहारी
राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान
जय हनुमान …
मातुपिता, गुरु, गनपति, सारद, सिवा समेत संभु सुख नारद
चरन बंदी बिनबौ सब काहूँ, देहु रामपद नेह निबाहूं
बंदौ राम लखन बैदेही, जे तुलसी के परम सनेही
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