
( भजन
– मारबो रे सुगवा धनुख से...
नारियलवा जे फरेला खबद से,
ओह पर सुगा मेड़राए,
ऊ जे ख़बरी जनैबो अदित से,
सुगा दिहली जुठियाय,
ऊ जे मारबो रे सुगवा धनुख से,
सुगा गिरे मुरझाए,
ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से,
अमरुदवा जे फरेला खबद से,
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से,
सभे फलवा जे फरेलन खबद से,
ऊ जे सुगनी जे रोवेली वियोग से,
आदित होई ना सहाय,
देव होई ना सहाय,
– श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहो
– कभी फुर्सत हो तो जगदंबे भजन लिरिक्स
– श्री महालक्ष्मी अष्टकम
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