
जिसके आने से सिद्धि संग
रिद्धि आती है
वो गणपति अपना साथी है
जिसकी सेवा हर घर में
मंगल बरसाती है
सदा ही साथ निभाते हैं
अपने गले लगाते हैं
निस दिन ध्यान धरे जो भी
उसके हृदय बस जाते हैं
निश्छल भक्ति ही उसके
मन को भाती है
दयावन्त श्री गणनायक
स्वामी सबका कृपाला है
प्रेम की बूंदे बरसाए
ऐसा वो दीनदयाला है
जिनके चरणों में विपदा
पल में मिट जाती है
जहां गणपति की प्रतिमा है
मंगल वहाँ पे होते हैं
वर से निर्धन धनी करें
निर्बल सबल भी होते हैं
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