
Mere To Girdhar Gopal
– मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न...
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई,
जाके सर मोर मुकुट, मेरो पति सोई ।
कोई कहे कारो, कोई कहे गोरो,
लियो है अँखियाँ खोल,
कोई कहे हलको, कोई कहे भारो,
लियो है तराजू तौल ।
कोई कहे छाने, कोई कहे छुवने,
लियो है बजन्ता ढोल,
तन का गहना मैं सब कुछ दीन्हा,
लियो है बाजूबंद खोल ।
असुवन जल सींच सींच प्रेम बेल बोई,
अब तो बेल फ़ैल गयी,
आनंद फल होई ।
तात मात भ्रात बंधू,
आपणो ना कोई,
छाड़ गयी कुल की कान,
का करीहे कोई ।
चुनरी के किये टोक,
ओढली लिए लोई,
मोती मूंगे उतार,
बन माला पोई ।
– तू मन की अति भोरी ओ मैया मोरी
– बड़ी देर भई नंदलाला तेरी राह तके बृजबाला
– सज मत श्याम नजर लग जाएगी...
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