
ॐ जय जगदीश हरे Om Jai Jagdish
रंग बदलते समय के
हो अपनी समझ के परे
हमको राह दिखाओ
हो विनती तुमसे करें
विनती तुमसे करें
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
सर हैं झुके अपने
नैना भरे
हो धन दौलत तो
हमने कमाई
सुविधा की हर
चीज जुटाई
घर आंगन कब के भरे
ये मन क्यों न भरे
समझ ना आए
हो भोर की किरणें
हम से छुटी
रात की निंदिया
फ़िकर ने लुटी
कैसे मिले चैन हमें
जतन कौन करे
हो पार इस दलदल के
हो पाँव कैसे धरे
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