
पधारो शबरी की मेहमान भजन लिरिक्स|
शबरी की मेहमान पधारो
बिना प्रेम दुर्योधन की ग्रह |
छोड़ चले पकवान
रूखे साग बिदुर घर खायो |
प्रेम शहित सुख मान
पधारो शबरी की मेहमान
द्रुपद सुता की लाज बचाई |
मध्य सभा में आय
खीचत चीर दुशाष्ण हारा |
चूर कियो अभिमान
जल डूबत गजराज उबारे |
तात शब्द सुन कान
सारथि पद पारथ रथ हाक्यो |
समर भूमि मैदान
गणिका गीध अजामिल पापी |
तारे अधम महान
भिक्छु अति है शरण तुम्हारी |
मीरा के भगवान
शबरी की मेहमान
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