
राम रूप माँ कौशल्या की कोख में
आये स्वयं नारायण
शुरू हुई लो रामायण
पुण्य प्रतापी राजा दसरथ के कुल में जन्मे
वैकुण्ठ उतरा हो जैसे दसरथ के आंगन में
महादेव गौरी से बोले
महादेव गौरी से के
भगवान आये हैं अयोध्या
दीये जलाओ दीये जलाओ
मंगल गाओ राम आये है अयोध्या
दीये जलाओ मंगल गाओ राम आये है अयोध्या
तीनो लोक के स्वामी है जो
तीनो लोक के स्वामी है
श्री राम आये है अयोध्या
दीये जलाओ मंगल गाओ
राम आये है अयोध्या
ज्ञान लिया और वचन दिया की
जब तक देह में प्राण रहेगा
न्याय रहेगा धर्म रहेगा
उस पलड़े में राम रहेगा
गुरु का लेके आदेश
राम चले हैं मिथिला देश
अवध से आये जनकपुर राम देखो
हो गया है जनकपुर ये धाम देखो
एक दरस में मोह लिया रे हो गई
मैं तो तेरी सिया रे
जैसे विष्णु लक्ष्मी की जोड़ी
जैसे शिव के साथ में हो गौरी
वैसे ही मैं आज से हूँ तेरा
वैसे ही तू आज से है मेरी
भरहु मांग ना करहुं देरी
फूल बिछाओ तारे सजाओ
सिया राम आये है अयोध्या
शुभ बेला बीत गई
कब तक महलों में पलना था
मानव रूप में जन्मे थे
वो काँटों पे भी चलना था
काँटों पे भी चलना था
लेके नई बियाही दुल्हन
साथ में लेके भ्राता लक्ष्मण
राम वन की और चले
प्राणो से भी प्यारी अयोध्या छोड़ चले
प्यारी अयोध्या छोड़ चले
काल जिसके हाथ से हाँ
हाथ से ही रचा बना है
उसको अपनी उँगलियों पे
उँगलियों पे नचा रहा है
काल ये तूने क्या किया
माँ तूने क्या मांग लिया
पिता ने ही वनवास दिया
जनक नंदनी जीवन
संगिनी का छल से हरण किया
उसी सण में रावण ने तय अपना मरण किया
तय अपना मरण किया
समुन्द्र के सीने पे
चलके राम आए हैं लंका
रावण का जो अहंकार था
धु धु करके धनका
समुन्द्र के सीने पे चलके
राम आए हैं लंका
पुण्य पाप के बीच हुए
महायुद्ध का ये परिणाम था
तीनो लोक में गुंजा जय जय जय
जय जय राम के नाम का
चरणों में आ के बोले विभीष्ण
खत्म हुआ वनवास ऐ भगवन
तार दो हमको बनके राजन
सौंप दिया लो जाने दो हमको
लंका अब तुम्हारी कर्मभूमि
कितने बरस से राह तकती है
हमरे लिए हमरी जन्मभूमि
लखन सिया हनुमान के संग संग
लखन सिया हनुमान के
संग भगवान आए हैं अयोध्या
दीये जलाओ मंगल गाओ राम आये है
अयोध्या
मगंल भवन अमंगल हारी
अवध में राम आये हैं
राम कथा सब विधि सुखदाई
सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ
श्री राम चंद्र कृपालु
जय जय राम
तूने अजब रचा भगवान
दुनिया चले ना
कभी राम बनके कभी श्याम बनके
मरियादा पुरुषोत्तम राम
सीता राम सीता राम कहिये
राम की भक्ति में
जय श्री राम
जय श्री राम बोलो
रघुवर श्री रामचंद्र जी
जिस भजन में राम का नाम ना हो
स्वीकारो मेरा परनाम
राम का गुणगान करिये
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