
तीन बार भोजन भजन एक बार
तेरा झूठा मोह जगत में तोते से बोली मैना
राम झूलेंगे तो पालना झुलाऊँगी
मगंल भवन अमंगल हारी
अवध में राम आये हैं
राम कथा सब विधि सुखदाई
सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड पाठ
श्री राम चंद्र कृपालु
जय जय राम
तूने अजब रचा भगवान
दुनिया चले ना
कभी राम बनके कभी श्याम बनके
मरियादा पुरुषोत्तम राम
सीता राम सीता राम कहिये
राम की भक्ति में
जय श्री राम
जय श्री राम बोलो
रघुवर श्री रामचंद्र जी
जिस भजन में राम का नाम ना हो
स्वीकारो मेरा परनाम
राम का गुणगान करिये
राम आये है अयोध्या
जय रघुनन्दन जय सियाराम
श्री राम चंद्र
मेरा जीवन तेरी शरण
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे
राम सिया राम
अवध में रघुराई
श्री राम, जय राम, जय जय राम
तेरे मन में राम, तन में है राम
है रोम रोम में राम रे
राम सुमीर ले, ध्यान लगा ले
छोड़ जगत के काम रे
राम नाम की लूट है, प्यारे लूट ले
पछताइयो ना, प्राण जाएँ जब छूट रे
माया में तू उलझा उलझा
दर-दर धूल उडाये
अब क्यों करता मन भारी
जब माया साथ छुडाए
दौड़ धूप में ही सारा दिन बीत गया
बीत ना जाए जीवन की अब शाम रे
छः लुटेरे तन के भीतर डाले बैठे डेरा
काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, मत्सरय ने कैसा घेरा
भूल गया ग़र राम राम रटना प्यारे
करता रह जाएगा भौतिक काम रे,
बोलो राम, बोलो राम, बोलो राम राम राम
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