
भजन बिना रह गयो पसु रे सामान
कहे दस संग्राम माना तरो अचरज आवे
मिनख् कियो महाराज भले तू काई चाह्वे
काई चावे जी बड़ा आ मोहे बता
भजन करले रात दिन
तरो जानम सफल हो जाए
जानम सफल हो जाए वास अमरपुर पावे
भजन बिना रह गयो रे पसु रे सामान
सुमिरन बिना रह गयो पसु रे सामान
सिंगर – सुनीता स्वामी
पाव दिया रे बंदा कीरत करवा
हाथ दिया रे कर दान
भजन रे बिना रह गयो पासु सामान
सुमिरन रे बिना रह गयो पासु रे सामान
रह गयो पासु रे स्मान
सुमिरन बिना रह गयो पासु रे सामान
नैन दिया रे बंदा दर्शन करवा
कान दिया सुन गयाँ
भजन रे बिना रह गयो पासु स्मन
डाट दिया रे बंदा मुखड़े रे शोभा ‘
जीभ डाइव रत राम
भजन रे बिना रह गयो पासु रे स्मन
सुमिरन रे बिना रह गयो पासु रे स्मन
भजन रे बिना रह गयो पसु सामान
कहत कबीर सुनो भाई साधो
हरी भाज उतरो पार राम भाज पार
भजन रे बिना रह गयो पसु रे सामान
सुमिरन रे बिना रह गयो पसु रे सामान
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