
सरस्वती माता, ज्ञान
की ज्योति
सरस्वती माता, ज्ञान की ज्योति,
अज्ञान तमस को दूर भगाती।
वीणा धारी, शुभ्र वस्त्रों में,
बुद्धि-विवेक का दीप जलाती।
शब्दों में माधुर्य भर दे माँ,
लेखनी को दे सच्ची धार,
विद्या का वरदान मिला दे,
खिले विचार, उजले संस्कार।
मन के आँगन उजियारती।
पुस्तक, वीणा, कमल
सुहानी,
शांत स्वरूपा, करुणा रानी,
श्रद्धा से जो शीश झुकाए,
उस पर होती कृपा कहानी।
ना माँगूँ यश, ना माँगूँ मान,
बस दे दे माँ सच्चा ज्ञान,
सत्य-पथ पर चलना सिखा,
यही है मेरा वरदान।
जीवन को पथ दिखलाती।
सांस-सांस में बसे तेरा नाम,
मन मंदिर में हो तेरा धाम,
सरस्वती माता, जय-जयकार,
कर दे माँ जीवन सफल तमाम।
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