
अंगना में बालाजी घलवादे पलणा,
कृपा ऐसी करदे म्हारः झुलः ललणा,
मैं बांझ लुगाई सुँ,
तेरे दर प आई सुँ,
चिंता ने खाई,
तेरी अर्जी लयाई,
सुँ दुनिया बोली मारः,
मन्नै पड़ रहया झलणा,
जलवा अपणा दिखला,
मेरा भी वंश चला,
मेरे मन का चमन खिला,
इंसाफ मन्नै भी दिला,
मैं भी चाहुँ गोदी में ले क लाल चलणा,
या दुनिया हुई दीवानी,
तेरी जोत नुराणी,
तुमसा ना कोई दानी,
बरसा रहमत का पानी,
जो तु लिखदे बाबा वो तो कैसे टलना,
तेरा जगराता करवाऊँ,
सोने की गदा घड़ाऊँ,
तेरी लाल धज्जा फेराऊँ,
और सवामणी भी लाऊँ,
गायक – नरेन्द्र कौशिक।
भजन प्रेषक – राकेश कुमार जी,
खरक जाटान(रोहतक)
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