
हाथ जोड़ के बोली गवर्जां
एक सुनो अन्तर्यामी
तीनों लोक बसाये बसती में
तूँ आप बसें वीराने में
अगड़ बम बबम, बगड़ बम बबम,
बम बबम बम, बम लहरी
एक सुनो जी पार्वती मेरी,
'एक सुनो गौरां रानी
इस जंगल में क्या पावेगी
कन्दली वन में डर जावेगी
हाथी चिंघाडे शेर दहाड़े
जीव जंतु और नर को खावे
अभी लौट जा ओ गौरां
अभी मान जा ओ गौरां
अल्ख निरंजन अल्ख निरंजन
तुम दीपक और मैं बाती
तुम चँदा मैं तेरी चकोरी
तुम सूरज और मैं ज्योति
आप फूल तो मैं हूँ खुशबू
तुम माला और मैं मोती
मेरे संग में विआह रचाओ
हे बन जाओ जीवन साथी
मुझे समझ ले बुझता दीपक,
'इस दीए में तेल नहीं
बारां बारां साल की लगे समाधि
रहे हमारा मेल नहीं
विआह शादी का सख़्त हैं बंधन
करनी मैं चाहता जेल नहीं
मेरे संग में विआह रचाना
कोई बच्चों का खेल नहीं
भंग पीऊँ मैं पीऊँ धतूरा,
'न पीऊँ शर्बत ताड़ी
अस्सी वर्ष की मेरी अवस्था
तेरी उम्र अभी है बाली
एक सुनो मेरे भोले नाथ जी
एक सुनो मेरे दीनानाथ जी
दिन भर तेरी भंग रगड़ूँगी
भंग रगड़ूँ तेरा रगड़ूँ धतुरा
काज़ करूँगी तेरा पूरा
हुकुम बजाऊँ तेरा पूरा
तुझे पिलाऊँ तेरा तिरग्नादिया
जो बच जावे मैं पी लूँगी
अमृत जान समझ पी लूँगी
शरण में ले लो भोलेनाथ जी
अपनी बना लो दीनानाथ जी
भस्म रमाऊँ धुनी रमाऊँ
तांडव कर कर डमरू बजाऊँ
गुफा बीच मेरा है डेरा
मेरे नागों की माला गले पड़ी
मेरे भूतों की टोली साथ खड़ी
तूँ तो देख इसे डर जावेगी
मेरे संग में क्या पावेगी
कोई अच्छा कुँवर राजा का ढूँढ ले
कोई रूप कुँवर राजा का ढूँढ ले
तूँ रानी बनकर बैठ महल में
अरे समझ जा गौरां री
दिए वचन को आज निभाऊँ
नहीं तो मेरा शाप पड़े
रूप जले तेरा जले नदिया
ज्यों पर्बत कैलाश जले
पेड़ फूल फल पात जलेंगे
बस्ती जंगल साथ जले
अभी मान जा भोले नाथ जी
तीनो लोक तेरे नाथ जले
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