
बाबा इबके फागण आज्याईये,
रंग लावांगे हम भी।।
राम लखन लयाणा जनक दुलारी,
जिनके बाबा तुम सो पुजारी,
एक ब दर्श करा जाईये,
बाबा इबके फागण आजाईये,
जैसे बृज में खेलें मुरारी,
हम भी संग में,खेलां थारी,
इन भगतां क रंग लाज्याईये,
जब जब आवः फागण महीना,
फेर गाम आणां जाणां कहीं ना,
प्रेम रंग बरसा जाईये,
कप्तान शर्मा देखःनजारा,
कपिल भगत भी संग मे आरया,
कुछ आ क ज्ञान सिखा जाईये,
गायक – नरेंद्र कौशिक जी।
प्रेषक – राकेश कुमार खरक जाटान(रोहतक)
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