
अपना जीवन सफल बनाये,
सब मिल राम नाम गुण गाय,
राम रामाय नमः राम रामाय नमः।।
तर्ज – तेरा पल पल बीता जाये।
अहिल्या थी श्राप की मारी,
राम चरण की थी अभिलाषी,
मुक्ति श्राप की हो जाये,
केवट प्रेम से हट कर लीन्हा,
पार उतारा कछु नहीं लीन्हा,
वो चरणों का अमृत पाये,
राम मिलन की आस लगाये,
शबरी बैठी पलक बिछाये,
प्रेम से झूठे बेर खिलाये,
राम नाम विभिषण गाया,
हनुमान के मन को भाया,
फिर तो राम से दिया मिलाय,
अन्त समय रावण का आया,
प्रभु राम का ध्यान लगाया,
वो मुक्ति का किया उपाय,
राम नाम को प्रेम से बोलो,
अपने पापों को तुम धोलो,
यह भवसागर पार कराये,
रामधुन मण्डल गुण गाया,
सब भगतों के मन को भाया,
राम की धुन में ही रम जायें,
प्रेषक – प्रीतम चन्द्र शर्मा
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