
अरे आज मारो मनड़ो हुओ वैरागी,
उठे हवारनो वेगो रे जीवडा,
अमल कालजे लागो ए हा।।
घर वाली ने हेलो रे मारीयो,
देवे नी लोटो आगो रे जीवडा,
देवेनी चुटीयो आगो रे जीवडा,
अरे अलीये गलीये फिरे भटकतो,
अरे करे अमल ने आगो रे जीवडा,
जाय अमलो मे नीचो बैठो,
गोडो बिच मे मातो रे जीवडा,
अरे एक हथेली ने दुजी हथेली,
तीजी पिवा लागो रे जीवडा,
अरे हाड गले ज्यारा मांस गले,
डगमग करवा लागो रे जीवडा,
अरे गाडो बेचीयो ने बलद बेचीया,
घर बेचवा लागो रे जीवडा,
अरे कहेसे कबीर सुनो रे भई संतों,
अमल राखजो आगो रे जीवडा,
भजन प्रेषक – मनीष जी सिरवी।
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