
अम्बाजी रो लाड़लो,
दोहा – भगत खडा दरबार में,
थारी चरना माय,
दर्शन दीजो बापजी,
म्हारी किजो खेतल सहाय।
सेवाडी भैरव देव,
अम्बाजी रो लाडलो,
भगता रो वारू,
खेतलाजी मोटो देव,
कुण कुण आवे जातरी ने,
कुण कुण सिवरे देव,
कुण तो करे रे भेरू री हरदम सेव,
अरे दुखीया आवे जातरू,
बांजन सिवरे देव,
दुखीया आवे जातरू,
पुजारी करे रे भेरूजी री हरदम सेव,
कुण तो चढावे बाकला ने,
कुण तो चढावे तेल,
कुण तो चाढे बाकला ने,
कुण तो चाढे तेल,
कुण तो चढावे खेतलाजी ने नारेल,
अरे बांजन चाढे बाकला ने,
तेलण चाढे तेल,
बांजन चाढे बाकला ने,
टाबरिया चाढे रे खेतलाजी ने नारेल,
अरे काई मांगे जातरू ने,
काई बांजन देव,
काई मांगे जातरू ने,
काई तो मांगे रे टाबरिया भैरव देव,
अरे अन्न धन मांगे जातरी,
बालक बांजन देव,
अन्न धन मांगे जातरी,
सुख संपत्ति मांगे टाबरिया भैरव देव,
दोय कर जोड्या अर्जुन बोले,
सिवरे खेतल देव,
शांतिलालजी आका दिरावे कर चरना री सेव,
शांतिलाल जी आका दिरावे कर चरना री सेव।।
गायक – प्रकाश माली जी, सोनू जोशी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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