
अरी मेरी अंसुवन भींगी साड़ी आ जाओ कृष्णा मुरारी,
एक लुप्त सुता की विनती सुन लेना कृष्णा मुरारी,
अरे सब लोग हंसे दें दें ताली आ जाओ कृष्णा मुरारी,
वो भीष्म पिता बलशाली और पांचों पति निहारी,
अरे मोहे सभी में करत उधाडी,
आ जाओ कृष्णा मुरारी,
क्या भूल गये बनवारी जब उंगली कटीं तुम्हारी,
अरे मैंने फाड़ी रेशम की साड़ी,
इतना सुनकर बनवारी और छोड़ी गरूड़ संवारी,
राधा पूछें रूक्मणी पूछें तुम कहां चले बनवारी
अरे वो ग्रे बनवारी आकर के चीर बड़ाई,
अरे वो हार गये बलशाली,
शीला रधुवंशी ।।। और भजन के लिए संपर्क
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