
अरे मै तो जोवु रे,
सावरिया थारी बाट।
दोहा- सांवरा ने ढूँढन मै गई,
ओर कर जोगन रो वेश,
ढूँढत ढूँढत जुग भया,
आया धोला केश।
घननामी थारी बाट,
वैरागन थारा नाम री।।
अरे अरट मे वे बारो ही मास,
बारो ही मास,
अरे इन्द्र वाली एक घडी,
अरे कोनी मारे परदेशी री प्रीत,
परदेशी री प्रीत,
टिलारो काई तापनो,
अरे ज्यारे रलाया काला केश,
रलाया काला केश,
ओडन ने पीलो कोमचो,
अरे इन रे सरवरिया वाली पाल,
सरवरिया वाली पाल,
पंछीडा ऊबा दोई जना,
अरे आगे मारा लक्ष्मण वीर,
लक्ष्मण वीर,
लारे राम राजवी,
अरे गुरू मिलीया माने रविदास,
माने रविदास,
मीरा ने सावरो आयी मिल्यो,
प्रेषक – मनीष सीरवी
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