
अरे हालो रे संतो देवरे,
गुरु जमो जोवाने हालो,
एक उछो सिंघासन रोम रो,
चरणों मे शीश नवाया,
हे गुरु ज्ञानी आया पोमणा,
गेरी गेरी महिमा करिये,
गंगा जल भरियो वटको,
पग धोया पायल लेना,
हे शरणा करणा छोटणा,
हरकी बधवा लेणा जी हे रामजी।।
अरे ऊंची अम्बरी गेरी गेरी छाया,
ऊँचो रे ढोलियो ढालाया,
अरे हुलगु पयोलो ढोलियो,
अमर ओसियो लेणा,
गुरु ज्ञानी आया पोमणा,
हेरि हेरि महिमा करिये,
गंगा जल भरियो वाटको,
के पग धोया पायल लेणा हे,
शरणा करणा जोटणा,
हरकी बधवा लेणा हे रामजी।।
अरे जगण डरेउ काची शेल रा,
ओ गुरु जारी गंगा जल लेना,
गुरु सोवण कुंडी गुजरी,
जीण माये नावण करिये,
ने पग धोया पायल लेणा,
हे शरणा करणा जोटणा,
सोवन थाली उजली,
जिनमे भोजन करिये,
ओ गुरु घेवर पूड़ियों ने लापसी,
माते कीरति गलिजे,
गेरी गरी महिमा करिये,
पग धोया पायल लेना हे,
शरणा कारणा चोटणा,
हरकी बधावो लेणा जी।।
अरे सोवण खेती पारति,
उण माये पग मत धरजे,
आ सतसंग खेती आपणी,
हरि भज लावा लेना,
ने पग धोया पायल लेना,
हरकी बधावा लेणा रे।।
अरे सोनो केजे सोलवो,
पीतल भेल मत कर्जे,
हे अण दोजी सोनी बोलिया,
मारो सायब साज पतीजे,
गंगा जल भरियो वाटको ने,
हरकी बधावो लेना जी हे रामजी।।
गायक – महेंद्र सिंह जी राठौर।
प्रेषक – तरुण वैष्णव
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