
श्याम की उंगली पकड़ के चलूँ
श्याम की उंगली पकड़ के चलूँ,
श्याम की रहमत पे मैं पलूँ,
मेरे साथ है दिन रात मेरा सांवरा,
तर्ज – श्याम मैं तेरा लाडला।
हारे का सहारा ये मेरा श्याम है,
शीश का ये दानी दाता महान है,
इनकी कृपा से चले मेरा कारोबार,
ये ही पालते है अब मेरा परिवार,
इनका नाम लेके सारे काम मैं करूँ,
मेरे दिल में क्या है सब जानते है ये,
मेरी सभी बातों को मानते है ये,
खुश रहूँ मैं सदा चाहते है ये,
मेरी सब मुश्किलें टालते है ये,
इनके उपकारों पे मैं अब जियूं,
बदहाल था मैं निहाल हो गया,
इतनी मिली खुशियाँ मालामाल हो गया,
मुझपे मेरे श्याम का है बड़ा करम,
इनकी भक्ति से सुधर गया मेरा जनम,
श्याम भक्ति में सदा ‘राजेश’ ये कहूँ,
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