
आई माताजी रा बैलीया रे गला में घुंगर बाजे
आई माताजी रा बैलीया रे,
गला में घुंगर बाजे।
दोहा – बिलाडे री आई माँ ने,
पुजे सीरवी समाज,
आई माता रा गुण गावसु,
मैया रखीयो मेरी लाज।
अरे गला मे घुंगर बाजे आईजी,
भगतो रा कारज सारे,
बैल मे बिराजे आईजी,
अरे आई माताजी रे बैल सवारी,
घणी फुटरी लागे,
आई माताजी रे बैल सवारी,
सखीया मंगल गावे आईजी,
बैल ने बधावे,
बैल ने बधावे आईजी,
सखीया गीत सुनावे,
जिन घर आईजी री बैल आवे,
भूत डाकनीया भागे,
बैल मे माँ आई बिराजे,
भगतो ने दर्शन देवे,
भगतो ने दर्शन देवे आईजी,
बेडो पार लगावे,
अरे आई माताजी रे बैल आगे,
गेर घूमर गाले,
आई माताजी रे बैल आगे,
अरे पग मे घुंगर बाजे गेरीयो रे,
पग मे घुंगर बाजे गेरीयो रे,
अरे आई पंथ री ध्वजा लहरावे,
भक्त जयकारो बोले,
अरे आई माताजी रे बैल साथे,
बाबा मंडली आवे,
आई माताजी रे बैल साथे,
धर्म गुरूसा आवे,
अरे धर्म गुरूसा आवे आईजी,
माधव सिंह जी आवे,
अरे आई पंथ री महिमा ने,
कोई “मनीष सीरवी” लिखे,
आई पंथ री महिमा ने कोई,
मनीष सीरवी लिखे,
बालोतरा सु ‘गणपत सिंह’ मैया,
गुण गान थारा गावे,
इन्द्र शर्मा संगीत बजावे,
गायक – गणपत सिंह जी चौहान
लेखक / प्रेषक – मनीष सीरवी
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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