
आगये भोले हम आ गए,
बोल बम बोल बम बोल बम
एक नहीं दो नहीं नहीं तीन चार,
कावड़ियों की आयी बाबा लम्बी कतार देखो,
पैदल है आने वाले
तुझको रिझाने वाले
जल चढ़ाने वाले।।
सावन की ऋतू आज क्या मस्ती लायी है
लेके तेरा नाम ये कावड़ उठायी है
भोले बाबा तेरे मिलन को,
खूब तपाया अपने बदन को,
ऋतू सावन को अपने मन भाया है,
रिमझिम बारिश खूब चले पुरवाई है।।
कोई खड़े कोई डाक कावरिया आया है,
भरके कोई दो दो गगरी कोई झूला लाया है,
बोल रहे है सारे बम बम
बम बम जपते मिटते है गम
आके तेरे दर पे शीश झुकाया है
देवो में महादेव तुहि तो कहलाया है।।
जो भी सच्चे दिल से कावड़ लता है,
गंगा जल और बेल के पत्र चढ़ाता है,
मुँह माँगा वर आप हो देते,
भक्तो की झोली भर देते,
हर हर बम बम जो भी प्रेम से जाता है,
सोई किश्मत तेरे दर पे जगाता है।।
हो हो.... आगये.... भोले हम आ गए
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