
( गजाननं भूत गणादि सेवितं,
कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ॥ )
शिव गौरां के, राज दुलारे
मुंह माँगा, फ़ल पाईऐ,
आदि गणेश मनाईए
जय जय, जय जय, गणपति जी की
चंदन चौकी, अध्क विराजे
गंगा, जल से नहलाईए,
फ़ूल माल ग़ल, हार विराजे
मस्तक, तिलक लगाईए,
पान सुपारी, ध्वजा नारियल
पहलड़ी, भेंट चढ़ाईए,
गिरी छुहारा, और खोपरा
लडडूयन, भोग लगाईए,
सिमर चरण तेरा, ध्यानु यश गावे
मईया नू सिमरिया, नौं निद्धि पावे
चरनों में, शीश झुकाईए,
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