
शिव जी की महिमा अपरम्पार है,
आया शिवरात्रि का त्यौहार है,
चरणों में नतमस्तक संसार है,
तर्ज – साजन मेरा उस पार।
जिनके उर में सर्पो की माला है,
भस्म रमाए बैठा डमरू वाला है,
सिर पर जिनके गंगा की धार है,
दुनिया उनकी करती जय जयकार है,
भांग धतूरा बेल पत्र ले आए है,
गंगा जल में अक्षत फूल सजाए है,
होंठों पे भरे बस ओमकार है,
शिवजी के मंत्रो का गुंजार है,
ईच्छा जन जन की ये पूरी करते है,
झोली हरदम भक्तों की ये भरते है,
दर्शन करने से ही उद्धार है,
गजब ‘अनुज देवेंद्र’ इनका शृंगार है,
स्वर – देवेंद्र पाठक जी महाराज।
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