
आया सावन सुहाना है शिव के घर जाना है,
कोई दे दो रे ठिकाना, मुझे कावड़ चढ़ाना है,
हरी ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ नमः शिवाय.....
नहीं देखा में उसको नहीं देखा वो मुझको,
फिर भी मन ये माने महादेव सदा उसको,
में ऐसे समझता हूँ सब साथ पुराना है,
कहते हैं सब मुझको भोला भंडारी है,
जो शरण पड़ा उसकी हर विपदा टाली है,
ऐसे में पाऊँ तुम्हें होकर में दीवाना,
गल में सोहे इनके सर्पों की माला है,
रहता है मस्त सदा पिए भंग का प्याला है,
मस्तक चंदा सोहे कहता ये ज़माना है,
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