
आये नहीं घनश्याम जो साडी सर से सरकी
सरकी सरकी पांचो वर की आस लगी है मोहे गिरधर की
आये नहीं घनश्याम जो साडी सर से सरकी
पाँचों पति सभा में बैठे जैसे बैठी नारी
द्रोणाचार्य पितामह बैठे नीचे गर्दन डारी
अपनों ने मुख मोड़ लिया है मोहे केवल आस तिहारी
याद करो उस दिन की मोहन अंगुली कटी तिहारी
फाड़ के साडी अपने तन की बाँधी तुरंत मुरारी
बेगे पधारो नाथ हरी तुम लुट ना जाए लाज हमारी
भरी सभा में एकली थारी मैं किस्मत की मारी
दुशासन मेरी साडी खींचे हुई शरम से मैं पानी
पूर्ण रूप से किया समर्पण आओ ना आओ अब मर्ज़ी तिहारी
आ ही गए घनश्याम जो साडी सर से सरकी
ऐसे ही सुन्दर भजन आप निचे दी गयी सूचि में देख सखते है
गणेश जी के भजन
विट्ठलाचे अभंग मराठी
राधा कृष्ण के भजन
कृष्णाच्या गवळणी मराठी
शिव जी के भजन
गुरुदेव के भजन
माता रानी के भजन
दादाजी धुनिवाले के भजन
साईं बाबा के भजन
देश भक्ति गीत
राम जी के भजन
फ़िल्मी तर्ज पर भजन
हनुमान जी के भजन
बधाई गीत
आरति संग्रह
चालीसा संग्रह
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


