
इक रात तबस्सुम में मिलने को श्याम आये
तर्ज - होंठों से छु लो तुम
इक रात तबस्सुम में, मिलने को श्याम आये,
आंखें बरसे मेरी, मेरे होंठ थे मुसकाये
हौले हौले दिल की, धड़कन धडकाई थी,
जब श्याम ने अंखियों से, मेरे अंखियां मिलाई थी,
नज़रों को नजारों में, बस श्याम नजर आये,
आंखें बरसे मेरी.......
होठों पर हकलाहट, कहना कुछ भी मुश्किल,
मैं डुब गया उन में, वो था मेरा साहिल,
कुछ भी ना छिपा उन से, हम कुछ ना कह पाये,
हर ओर फिज़ाओं में, इक खास तरन्नुम था,
सुध-बुध खोयी मैंने, वो भी मुझमें गुम था,
"बिट्टु" का जीवन तो, हो श्याम तो महकाये,
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