
इन भारत देश में कैसी फैशन आई,
दोहा – श्वास लेता हूँ तो,
जख्मों को हवा लगती हैं,
ए जिंदगी तु मेरे क्या लगती हैं?
सुखों की सोत,
दुखों की दुल्हन लगती हूँ,
सही मायने से जिओ,
वरना मौत लगती हूँ।
हाथ जोड़ कर करु विनति,
सुनो बात सज्जनों मेरी,
आज सुनाता हूँ मैं तुमको,
बाता सारी फैशन की,
इस दुनिया ने मती बिगाड़ी,
अपने भारत देशन की,
चिमनी भर का तेल नहीं,
जो बात करें टेगेशन की,
घर बोलना आता नहीं और,
बात करें वो लेक्चर की,
घर आवे जद रोल मचावे,
रो रो देख लुगाई रे,
धोती पहनना छोड़ दिया और,
पेहरण लागा पैंट और बूट,
बाहर जाय ने करें मजूरी,
तनखा सारी जावें छुट,
केवें हेलीकॉप्टर चलावा,
घर आवे जद बोले झूठ,
लम्बा लम्बा बाल बढावे,
जुआं बैंठ ने काढे अपुट,
जुआं बैठने काढ़े अपुट,
देखा देखी पङवा लागी,
अब देखो भायों में फूट,
सीनो तान चले गलियां में,
मन में करें बढ़ाई,
रामा श्यामा चला गया हैं,
चला गया है नमस्कार,
हाथ मिलावे झटका मारे,
थैंक यू बोले बारम्बार,
होटल से चाय मंगावे,
घर आवे जद भुआ तैयार,
बात कहे वो पर घर बैठा,
मन में है वो है हुशियार,
इस कलयुग में मौज उड़ावे,
के दर्जी के नाई,
घमक घाघरा छोड़ दिया और,
पैरण लागी पेटी कोट,
जुती जगह सैंडल पेरे,
चाहे आए पैरों में चोट,
जूती जगह सैंडल पेरे चाहे,
आए पैरों में चोट,
एक हाथ में कड़ा पहन कर,
एक हाथ में बांधे घड़ी,
अपने पति के सामे बोले,
आंख दिखावे बड़ी बड़ी,
‘रामनिवास’ कहे भारत में,
आ काई फैशन आन पड़ी,
राम निवास कहे भारत में,
चार चार आँगल बाल कटावे,
चाहे बाई केवो साहे भाई,
गायक – प्रमोद पंडित।
प्रेषक – सौरव गर्ग अर्जियाना।
(तह. – सिवाना जिला – बाड़मेर )
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