
इस दुनिया में सुंदर सुंदर,
फूल खिलाने वाला,
तरह तरह की कठपुतली को,
नाच नचाने वाला,
बोलो कौन है,
बोलो बोलो कौन है,
सबकुछ करता रहता,
फिर भी मौन है,
देखे – मारने वाला है भगवान।
कभी ध्यान सागर में जाता,
कितना जल ठहराया,
उसके ऊपर गेंद बनाकर,
भूमंडल को बसाया,
उसे तराने वाला,
सारी सृष्टि रचाने वाला,
नीलगगन में जगमग जगमग,
चमके चाँद सितारे,
बिना सड़क के दौड़ा जाता,
सूरज का रथ प्यारे,
उसे भगाने वाला,
सारे नियम चलाने वाला,
कलम रुकी बुद्धि चकराई,
देख हरि की माया,
पंकज में से ब्रह्मा निकले,
कण कण ब्रह्म समाया,
कभी हंसाने वाला,
कभी रुलाने वाला,
स्वर – पं. मनीष गौतम शास्त्री।
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